जनऔषधि केंद्रों में युवा फार्मासिस्टों की सेवा
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दिल्ली में लगभग 600 जनऔषधि केंद्र संचालित हैं, जहां करीब 70 प्रतिशत कर्मचारी युवा हैं और हर दिन सैकड़ों मरीजों को सस्ती दवाओं की सुविधा मिल रही है।
जनऔषधि केंद्रों पर मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी दवाओं के किफायती विकल्प मिलते हैं, जिससे दवा खर्च कम होता है और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान बनती है।
नई दिल्ली/ देश में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) आज लाखों मरीजों के लिए राहत का बड़ा सहारा बन चुकी है। अस्पतालों के व्यस्त माहौल और चिंतित मरीजों के बीच जनऔषधि केंद्रों पर काम कर रहे युवा फार्मासिस्ट उम्मीद की नई किरण बनकर उभर रहे हैं। ये युवा न केवल डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयों के किफायती विकल्प उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि मरीजों को सही जानकारी देकर उनके मन से दवाओं की महंगाई का डर भी दूर कर रहे हैं।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के परिसर में स्थित जनऔषधि केंद्र भी इसी सेवा भावना का उदाहरण है। यहां काम करने वाली युवा वरिष्ठ फार्मासिस्ट संगीता अक्टूबर 2024 से इस मिशन का हिस्सा हैं। उनका कहना है कि हर दिन कई ऐसे मरीज आते हैं जो दवाओं की कीमत को लेकर चिंतित होते हैं।
संगीता बताती हैं कि जब मरीज डॉक्टर का पर्चा लेकर केंद्र पर पहुंचते हैं तो उनके चेहरे पर चिंता साफ दिखाई देती है। लेकिन जैसे ही उन्हें दवाओं की सस्ती कीमतों के बारे में बताया जाता है, उनके चेहरे पर राहत और मुस्कान लौट आती है। उनके अनुसार यही मुस्कान उनके काम को अर्थपूर्ण बनाती है।
इस केंद्र पर हर दिन करीब 150 से 200 मरीजों को दवाइयां दी जाती हैं। सुबह के समय यहां सबसे ज्यादा भीड़ रहती है और मरीजों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसके बावजूद केंद्र का युवा स्टाफ पूरी जिम्मेदारी के साथ पर्चियों की जांच, दवाओं का प्रबंधन, बिलिंग और मरीजों को सही जानकारी देने का काम करता है।
इसी तरह युवा फार्मासिस्ट वरुण अग्रवाल भी इस मिशन से जुड़कर गर्व महसूस करते हैं। हाल ही में अपनी फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने वाले वरुण बताते हैं कि अब लोगों में जेनेरिक दवाओं के प्रति जागरूकता पहले से ज्यादा बढ़ रही है। खासकर वरिष्ठ नागरिक जनऔषधि केंद्रों को उम्मीद के साथ देखते हैं।
वहीं इंदिरा गांधी अस्पताल (आईजीएच) के जनऔषधि केंद्र के प्रबंधक और फार्मासिस्ट पीयूष का कहना है कि यहां आने वाला हर व्यक्ति किसी न किसी चिंता के साथ आता है, लेकिन सस्ती दवाएं मिलने के बाद राहत महसूस करते हुए लौटता है। उनके मुताबिक यही बदलाव इस मिशन की असली सफलता है।
आईजीएच के ही एक अन्य युवा फार्मासिस्ट हिमांशु कुमार बताते हैं कि उनकी टीम में कुल पांच सदस्य हैं, जो मिलकर केंद्र का संचालन संभालते हैं। इनमें से दो सदस्य बिलिंग और दो सदस्य दवाओं के वितरण की जिम्मेदारी निभाते हैं।
दिल्ली में करीब 600 जनऔषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं और इनमें लगभग 70 प्रतिशत कर्मचारी युवा हैं। ये केंद्र न केवल किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, बल्कि युवाओं को समाज सेवा का एक सार्थक मंच भी प्रदान कर रहे हैं।